२५ गुरु वाणी (एक पन्ने के स्वर्णिंम सूत्र )
कुछ धार्मिक प्रश्नों का उचित समाधान
देवताओं, अवतारों और ऋषियों की उपास्य गायत्री - Complete
कर्मकाण्ड क्यों और कैसे - Complete
From the 70 Vangmayas:
- Grihastha Ek Tapovan: गृहस्थ एक तपोवन है
- Ishwar Kaun Hai: ईश्वर कौन है कहाँ है कैसा है
Gayatri Mantra Series
ईश्वर का विराट रूप (Aum)
ब्रह्मज्ञान का प्रकाश (Tat)
शक्ति का सदुपयोग (Sa)
धन का सदुपयोग (Vi)
आपत्तियों में धैर्य (Tu)
नारी की महानता (Va)
गृहलक्ष्मी की प्रतिष्ठा (Re)
प्रकृति का अनुसरण (Nyam)
मानसिक संतुलन (Bha)
सहयोग और सहिष्णुता (Go)
इंद्रिय संयम (De)
पवित्र जीवन (Va)
परमार्थ और स्वार्थ (Sya)
सर्वतोमुखी उन्नति (Dhi)
ईश्वरीय न्याय (Ma)
विवेक की कसौटी (Hi)
जीवन और मृत्यु (dhi)
धर्मं की सुद्रढ़ धारणा (Yo)
प्राणघातक व्यसन (Yo)
सावधानी और सुरक्षा (Nah)
उदारता और दूरदर्शिता (Pra)
स्वाध्याय और सत्संग - Current
आत्मज्ञान और आत्म कल्याण
संतान के प्रति कर्तव्य
शिष्टचार और सहयोग
Kranti Dharmi & Advanced Literature
अध्यात्म विद्या का प्रवेश द्वार
ज्ञानयोग कर्मयोग भक्तियोग
सतयुग की वापसी
जीवन देवता की साधना आराधना
महिला जागृति अभियान
ईक्कीसवी सदी बनाम भविष्य भाग-२
परिवर्तन के महान क्षण
युग की मांग प्रतिभा परिष्कार भाग-१
युग कि मांग प्रतिभा परिष्कार भाग-२
जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र
मनस्थिति बदलें तो परिस्थिति बदले
आद्य शक्ति गायत्री की समर्थ साधना
शिक्षा ही नहीं विद्या भी
प्रज्ञावतार की विस्तार प्रक्रिया
नव सृजन के निमित्त महाकाल की तैयारी
ईक्कीसवी सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य भाग-१
समय दान ही युगधर्म
सृष्टा का परम प्रसाद प्रखर प्रज्ञा
समस्याएँ आज की समाधान कल के
संजीवनी विद्या का विस्तार
भाव संवेदना की गंगोत्री
नवयुग का मत्स्यावतार
ईक्कीसवी सदी का गंगावतरण
हम और हमारे कर्म